Skip to main content

5 आयुर्वेदिक जूस जो सेहत के लिए अमृत समान हैं।

 गिलोय का जूस (Amrita Juice)

  • किसके लिए फायदेमंद: इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने, पुराना बुखार दूर करने और खून साफ करने के लिए।

  • सामग्री: गिलोय की ताजी डंडी (लगभग 4-5 इंच लंबी), 1 गिलास पानी।

  • रेसिपी:

    1. गिलोय की डंडी को अच्छे से धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और उसे थोड़ा कूट (crush) लें।

    2. इसे 1 गिलास पानी में डालकर मिक्सी में पीस लें।

    3. अब इसे एक साफ सूती कपड़े या छन्नी से छान लें। गिलोय का ताजा जूस तैयार है। (इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे अच्छा होता है)।

2. आंवला और एलोवेरा का जूस (Miracle Detox Juice)

  • किसके लिए फायदेमंद: बालों को मजबूत बनाने, त्वचा में चमक लाने और पेट की समस्याओं (जैसे गैस या कब्ज) को ठीक करने के लिए।

  • सामग्री: 2 ताजे आंवले, एलोवेरा की पत्ती का गूदा (Gel) 2 चम्मच, आधा गिलास पानी।

  • रेसिपी:

    1. आंवले के बीज निकालकर उसके छोटे टुकड़े कर लें।

    2. एलोवेरा की पत्ती को छीलकर उसका साफ सफेद जेल निकाल लें।

    3. मिक्सी में आंवला, एलोवेरा जेल और आधा गिलास पानी डालकर अच्छी तरह चला लें।

    4. इसे छान लें और चाहें तो इसमें एक चुटकी काला नमक मिलाकर पिएं।

3. पुदीना और तुलसी का जूस (Cooling Digest-Aids)

  • किसके लिए फायदेमंद: पाचन तंत्र को दुरुस्त करने, कफ-सर्दी से राहत देने और पेट को ठंडक पहुंचाने के लिए।

  • सामग्री: 10-15 पुदीने के पत्ते, 7-8 तुलसी के पत्ते, 1 गिलास पानी, आधा नींबू का रस।

  • रेसिपी:

    1. तुलसी और पुदीने के पत्तों को अच्छे से धो लें।

    2. इन्हें थोड़े से पानी के साथ मिक्सी में या सिलबट्टे पर पीस लें।

    3. बाकी का पानी मिलाकर इसे छान लें और ऊपर से नींबू का रस निचोड़ दें। यह गर्मियों के लिए बेहतरीन ड्रिंक है।

4. करेला और जामुन के पत्तों का जूस (Sugar Control Juice)

  • किसके लिए फायदेमंद: ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने और खून को साफ करने के लिए।

  • सामग्री: 1 छोटा करेला, 3-4 जामुन के ताजे पत्ते, आधा गिलास पानी।

  • रेसिपी:


    1. करेले को धोकर उसके बीज निकाल लें और छोटे टुकड़े कर लें।

    2. जामुन के पत्तों को भी साफ कर लें।

    3. दोनों को मिक्सी में आधे गिलास पानी के साथ पीस लें और कपड़े से छानकर इसका रस निकाल लें। (यह स्वाद में कड़वा होता है, लेकिन सेहत के लिए बेहद गुणी है)।

5. लौकी का जूस (Heart & Weight Care Juice)

  • किसके लिए फायदेमंद: हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, वजन घटाने और दिल को स्वस्थ रखने के लिए।


  • सामग्री: 1 कप कटी हुई ताजी लौकी, 5-6 पुदीने के पत्ते, थोड़ा सा सेंधा नमक।

  • रेसिपी:

    1. लौकी को छीलकर थोड़ा सा टुकड़ा चख लें (ध्यान रहे कि लौकी कड़वी नहीं होनी चाहिए, कड़वी लौकी सेहत के लिए हानिकारक होती है)।

    2. लौकी के टुकड़ों और पुदीने को मिक्सी में पीस लें।

    3. इसे छानकर इसमें एक चुटकी सेंधा नमक मिलाएं और तुरंत पिएं (लौकी का जूस पीसने के बाद ज्यादा देर रखना नहीं चाहिए)।

 

Comments

Popular posts from this blog

क्या स्क्रीन छीनने पर आपका बच्चा भी हिंसक हो जाता है? जानिए 'डोपामिन क्रैश' और 'री-बाउंड एंगर' का छुपा हुआ सच!

 एक माँ होने के नाते, क्या आपने कभी इस खौफनाक मंज़र का सामना किया है? शाम के सात बज चुके हैं। आपका बच्चा पिछले दो घंटे से लगातार मोबाइल स्क्रीन से चिपका हुआ है। आप पास जाती हैं और प्यार से कहती हैं, "बेटा, बहुत देर हो गई, अब फोन मम्मी को दे दो।" वह अनसुना कर देता है। आप दोबारा कहती हैं, वह चिढ़ जाता है। और जैसे ही आप उसके हाथ से जबरदस्ती फोन छीनती हैं... अचानक घर का माहौल बदल जाता है। वह मासूम बच्चा चीखने लगता है, रोने लगता है, हाथ-पैर पटकता है, या शायद आपके हाथ पर काट लेता है या कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर लेता है। इस मोड़ पर आकर हर माँ का दिल टूट जाता है। हमारे मन में पहला विचार आता है— "मेरा बच्चा इतना बदतमीज़ और हिंसक कैसे हो गया? मैंने इसके पालन-पोषण में कहाँ कमी छोड़ दी?" मेरी प्यारी बहनों, खुद को दोष देना बंद कीजिए। आज एक माँ और चाइल्ड गाइड होने के नाते, मैं आपको इस गुस्से के पीछे का वो डरावना सच बताने जा रही हूँ, जो इंटरनेट पर कोई नहीं बताता। आपका बच्चा बदतमीज़ नहीं है, वह 'डोपामिन क्रैश' और 'री-बाउंड एंगर' नाम की एक मानसिक स्थिति से गुज़र रहा ह...

डिजिटल धुंध में खोता बचपन: जब स्क्रीन की रोशनी बच्चों के मानसिक सुकून को सुखा देती है

  क्या आपने कभी सोते हुए बच्चे के चेहरे को ध्यान से देखा है? कितना सुकून, कितनी मासूमियत होती है वहाँ। लेकिन जैसे ही वह सुबह आँखें खोलता है, उसकी मासूम उँगलियाँ किसी खिलौने को नहीं, बल्कि स्मार्टफोन की ठंडी स्क्रीन को ढूँढती हैं। एक माँ होने के नाते, जब मैं आज के बच्चों को घंटों बिना पलक झपकाए स्क्रीन में खोए देखती हूँ, तो मेरा दिल काँप उठता है। हम जिसे सिर्फ 'मोबाइल की लत' (Screen Time) कहकर नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) के अनुसार, वह धीरे-धीरे बच्चों के भीतर एक गहरा मानसिक तनाव (Mental Stress) पैदा कर रहा है। आज 'ज्ञान रेमेडी' के इस मंच से, मैं आपकी मैनेजर और मार्गदर्शक बनकर, इस डिजिटल धुंध के पीछे छिपे कड़वे सच और उसके ममतामई समाधान पर गहराई से बात करने आई हूँ। यह ब्लॉग सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है, यह हर उस माँ-बाप के लिए है जो अपने बच्चे की खामोश ज़िद से परेशान हैं। 🧠 स्क्रीन और मानसिक तनाव का गहरा संबंध (The Core Issue): जब एक बच्चा लगातार स्क्रीन पर तेज़ बदलते रंग और आवाज़ें देखता है, तो उसके नन्हे दिमाग में 'डोपामाइन' नाम का केम...

क्या आप भी 'फैंटम पेरेंट' हैं? जानिए कैसे आपकी 'मूक मौजूदगी' बच्चे को अकेला कर रही है

 एक शाम, सात साल का आरव अपनी माँ के पास एक कागज़ का टुकड़ा लेकर आया। उस पर एक सुंदर सी ड्राइंग बनी थी। उसने बड़े उत्साह से कहा, "मम्मा, देखो मैंने क्या बनाया!" माँ ने सोफे पर बैठे-बैठे, बिना मोबाइल से नज़रें हटाए, बस इतना कहा— "अरे वाह बेटा, बहुत सुंदर है। जाओ, थोड़ी देर टीवी देख लो।" आरव का वह उत्साह पल भर में गायब हो गया। वह चुपचाप अपने कमरे में चला गया। क्या आरव की माँ उस वक्त घर पर मौजूद थीं? हाँ, शारीरिक रूप से वो वहीं थीं। लेकिन क्या वो मानसिक रूप से वहाँ थीं? नहीं। इसी को मनोविज्ञान की भाषा में कहते हैं— 'फैंटम पेरेंटिंग' (Phantom Parenting) यानी एक ऐसी परवरिश जहाँ माता-पिता बच्चों के आसपास तो होते हैं, लेकिन एक 'परछाईं' की तरह.. मूक और अदृश्य। आज के इस प्रोफेशनल लेख में हम गहराई से समझेंगे कि यह अनजानी गलती हमारे बच्चों के भविष्य को कैसे दीमक की तरह चाट रही है ❌ पैरेंट्स की ३ बड़ी गलतियाँ (What Parents Do Wrong) झूठी मौजूदगी (The Illusion of Presence): यह सोचना कि "मैं दिनभर घर पर ही तो रहती हूँ।" याद रखिए, बच्चे को आपकी सिर्फ ...